अमेरिका के विदेश विभाग ने गुरुवार को कहा कि तुर्की की सीरिया में अमानवीय और अनैतिक कार्रवाई कर सीमा लांघी तो उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। 30 रिपब्लिकन सांसद तुर्की पर प्रतिबंध लगाने को लेकर संसद में बिल ला सकते हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने अफसरों को सुझाव दिया है कि तुर्की और कुर्दिश गुटों की की लड़ाई में मध्यस्थता कर समाधान निकाला जा सकता है।
इससे पहले तुर्की ने पूर्वोत्तर सीरिया में कुर्द लड़ाकों के 181 ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसमें 8 लोगों की मौत हो गई और 25 घायल हुए। हजारों लोगों को अफरातफरी के बीच घर छोड़ना पड़ा है। तुर्की ने यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों के उत्तर सीरिया छोड़ने के फैसले के 3 दिन बाद की है। ट्रम्प के फैसले की अमेरिका में आलोचना हो रही है।
वहीं, कुर्द लड़ाकों की सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) का कहना है कि तुर्की की सेना ने रिहायशी इलाकों में बम बरसाए। उन जेलों को निशाना बनाकर हमले किए, जिनमें आईएस लड़ाके बंद हैं। वहीं, कुर्दिश पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स ने अमेरिका से कहा कि हमले रुकवाएं। पूर्वोत्तर सीरिया को नो फ्लाई जोन घोषित करें।
'तुर्की जातीय नरसंहार करने पर आमादा'
स्पुतनिक न्यूज एजेंसी ने अमेरिकी अफसर के हवाले से कहा कि तुर्की जातीय नरसंहार करना चाहता है। उनकी सेनाएं जमीन और आसमान से आम जनता पर गोले बरसा रही हैं। ट्रम्प ने बुधवार को मिडिल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) से अमेरिकी सेना हटाने के फैसले को सही बताते हुए कहा था कि अमेरिका उस क्षेत्र में सेना पर 8 ट्रिलियन डॉलर (568 लाख करोड़ रुपए) खर्च कर चुका है। बीते सालों में वहां हमारे सैकड़ों सैनिक मारे जा चुके हैं।
तुर्की के हमले पर ट्रम्प ने कहा, ''हमने आईएस को 100% हरा दिया है। अभी तक सीरिया में किसी भी देश की सेना पर तुर्की ने हमला नहीं किया। वे (तुर्की) उन कुर्दों पर हमला कर रहे हैं, जो 200 साल से एक-दूसरे से लड़ रहे हैं।''
भारत के विदेश विभाग ने भी चिंता जताई
विदेश विभाग की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ''तुर्की द्वारा पूर्वोत्तर सीरिया में तुर्की के एकतरफा हमले पर भारत चिंतित है। तुर्की की कार्रवाई से क्षेत्र में स्थायित्व और आतंकवाद के खिलाफ जंग कमजोर पड़ेगी। हमले को मानव सभ्यता के लिए भी सही नहीं कहा जा सकता।''
सीरिया में 12 हजार आईएस आतंकी कुर्द लड़ाकों की कैद में
- कुर्द इराक, सीरिया, तुर्की, ईरान और अर्मेनिया के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। इनकी आबादी करीब 3.5 करोड़ है।
- सीरिया में 35 लाख कुर्द हैं। कुर्दों का अपना अलग देश नहीं है। पर वे आजादी के लिए मुहिम चला रहे हैं।
- आजादी की मुहिम के कारण कुर्दों का तुर्की, इराक, सीरिया और ईरान की सरकारों से अच्छे संबंध नहीं हैं।
- कुर्द लड़ाकू अपने कब्जे वाली 7 जेलों में बंद 12 हजार आईएस आतंकियों, उनके परिजन की निगरानी करते हैं।
अमेरिका: कुर्दों संग आईएस को हराया, अब साथ छोड़ा
कुर्द लड़ाके सीरिया में आतंकी संगठन आईएस को हराने में अमेरिका के प्रमुख सहयोगी रहे हैं। इस लड़ाई में 11 हजार कुर्द लड़ाके मारे गए। हमलों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि कुर्दों के खिलाफ तुर्की की योजना ठीक है। पर आलोचना होने पर कहा कि तुर्की सीरिया में हद न पार करे।
दुनिया: ईयू बोला-सेफ जोन से उम्मीद कम, यूएन ने बैठक की
यूरोपीय संघ ने कहा कि उम्मीद कम है कि सेफ जोन सीरियाई शरणार्थियों को वापस लेने की अंतरराष्ट्रीय शर्तें पूरी कर पाएगा। बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड और ब्रिटेन के कहने पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बैठक की। अरब लीग ने शनिवार को बैठक बुलाई है। नाटो के महासचिव येंस स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि तुर्की सोच-समझकर कदम उठाए।
तुर्की: सीमा पर डटे सीरिया के 35 हजार जवान
हमले के बाद सीरिया की नेशनल आर्मी के 35 हजार जवानों ने भी तुर्की सीमा पर गश्ती बढ़ा दी है। सीरिया में कुर्द लड़ाकों की सेना एसडीएफ के अलावा अमेरिका और रूस की सेनाएं भी मौजूद हैं